अयोध्या अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही पहला आवेदन प्राप्त हो गया है। यह आवेदन पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर की ओर से भेजा गया है। ट्रस्ट ने सोमवार को इस महत्वपूर्ण पद के लिए अधिसूचना जारी की थी और इच्छुक उम्मीदवारों से 18 जुलाई तक आवेदन मांगे हैं। अमिताभ ठाकुर ने ट्रस्ट को अपना बायोडाटा और आवेदन भेजने के बाद कहा कि वह विज्ञापन में निर्धारित सभी पात्रताओं को पूरा करते हैं और स्वयं को इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार मानते हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के आधार पर वह राम मंदिर के प्रशासन को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता रखते हैं। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पद के लिए सामान्य प्रशासनिक अनुभव के साथ धार्मिक आस्था को भी प्रमुख पात्रता के रूप में शामिल किया है।

आवेदन करने वाले उम्मीदवार का हिंदू, वैष्णव और भगवान श्रीराम का भक्त होना अनिवार्य रखा गया है। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों को किसी बड़े हिंदू मंदिर या धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का अनुभव होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर आवेदन प्रारूप, सेवा शर्तें और पात्रता संबंधी सभी दिशानिर्देश जारी किए हैं। आवेदन ई-मेल के माध्यम से स्वीकार किए जा रहे हैं। ट्रस्ट की अधिसूचना के अनुसार, सीईओ पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक होनी चाहिए। आवेदक की आयु 50 से 70 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास किसी सार्वजनिक संस्था, सरकारी विभाग, बड़े संगठन या निजी कंपनी में कम से कम 20 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव होना अनिवार्य है। यह अनुभव सामान्य प्रशासन, वित्त, लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा या विधिक कार्यों जैसे क्षेत्रों में होना चाहिए। सीईओ का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। यदि कार्य संतोषजनक पाया गया तो सेवा अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है। वेतन और अन्य सुविधाएं आपसी सहमति से तय की जाएंगी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीधे ट्रस्ट के महासचिव के प्रति जवाबदेह रहेगा। संस्था के सभी वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का संचालन सीईओ की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर सौंपे जाने वाले विशेष दायित्वों का निर्वहन भी उसे करना होगा।