डिजिटल डेस्क, जयपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर 37 वर्षीय रामस्वरूप गुर्जर अपनी कलाई पर बंधे रक्षासूत्र को देखते हैं, तो उन्हें एक और ऐसे बंधन का अहसास होता है जो दिखाई नहीं देता, लेकिन जिसकी वजह से वह आज जिंदा हैं।
सालों तक रामस्वरूप पीठ के गंभीर दर्द से राहत पाने के लिए पेनकिलर लेते रहे। इन दवाओं ने उनका दर्द तो कम किया, लेकिन धीरे-धीरे इनकी वजह से उनकी किडनियां खराब हो गईं। जब तक उन्होंने डॉक्टरी सलाह ली, तब तक उनकी दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी थीं।
इस बीमारी का पता चलने पर रामस्वरूप और उनका परिवार पूरी तरह टूट गया था। जीवित रहने के लिए उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी।बहन ने बिना हिचकिचाहट के बढ़ाया कदमछह भाई-बहनों वाले इस परिवार में रामस्वरूप की सबसे बड़ी बहन, 60 वर्षीय सुगना गुर्जर आगे आईं। उन्होंने जरा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उनका छोटा भाई गंभीर रूप से बीमार था और उनके पास उसकी जान बचाने का मौका था।